दिव्य विचार: स्वर्ग-नरक का स्वतंत्र अस्तित्व है- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज
मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि तुम्हारे जीवन का बहुभाग नरकों में बीता है। नरकों में तुमने जो दुःख भोगा है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। आज तुम भूल गए हो, बिसर गये हो। अगर नरकों के दुःखों को ठीक से याद करना चाहते हो तो मेरे साथ चलो । नरक का दर्शन करो। देखो, नरक में कितनी आहि-त्राहि मची हुई है। कितनी पीड़ा है, कितना दुःख है, कितना कष्ट है और नरक में जाने वाले हर प्राणी को कितना बाध्य होना पड़ता है। तुम नरक घूमकर आये हो, लेकिन तुम्हें नरक का कोई अनुभव नहीं। यदि तुम ठीक ढंग से नरक का अनुभव करना चाहते हो तो चलो मेरे साथ, मैं तुम्हें नरक ले चलता हूँ। आप कहोगे - महाराज ! नरक ले चलने की बातें क्यों कर रहे हो। हम तो आपके पास इसलिए आते हैं कि आपसे कुछ सीखें और स्वर्ग का मार्ग प्रशस्त करें। आप तो मुझे नरक ले जाने की बात कह रहे हैं। यह तो ठीक नहीं। वहाँ तो भारी कष्ट है। घबराओ नहीं, मैं तुम्हें नरक ले चलता हूँ, लेकिन मेरे साथ चलोगे तो नरक जाने के बाद भी नरक के कष्टों से बचे रहोगे। बल्कि नरक के दर्शन करने के बाद तुम इतना सामर्थ्य पा लोगे कि भविष्य में कभी नरक जाने की नौबत भी नहीं आ सकेगी। उस नरक का दर्शन करो जो शास्त्रों में लिखा है, उसको समझो। बन्धुओ ! ध्यान रखना कि स्वर्ग और नरक का अस्तित्व केवल हमारे विश्वास पर केन्द्रित है। उसे प्रत्यक्ष करके नहीं दिखा सकते। तुम मानो तो स्वर्ग है, नहीं मानो तो नहीं है। फिर भी एक बात ध्यान रखना कि तुम्हारे मानने न मानने से उसके अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता। स्वर्ग है, नरक है, उनका स्वतन्त्र अस्तित्व है, लेकिन उन्हें बताया नहीं जा सकता। दुनिया में बहुत सारे लोग हैं जो कहते हैं कि जो है वह दिखाई पड़ता है और जो नहीं है, वह दिखाई नहीं देता। मैं उनकी इन बातों से पूरी तरह सहमत नहीं हूँ। ध्यान रखना, कि जो-जो दिखाई पड़ता है वह सच है और जो-जो दिखाई नहीं पड़ता है, वह सब झूठ है, ऐसी धारणा अधूरी है। दूर क्षितिज में धरती और आसमान एक हुए से दिखाई देते हैं। वे दिखाई ज़रूर देते हैं पर हैं नहीं।






