दिव्य विचार: गलत विचारों से बचें- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज
मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि अगर व्यक्ति की सोच रचनात्मक हो तो उन फालतू की चीजों से भी काम की चीज बना सकता है। उन्हें सजा दिया और देखा तो लगा कि आकर्षण। मैं तुमसे कहता हूँ कि फालतू का काम करना बन्द करो और फालतू की चीजों को भी काम में लेना सीख जाओ तो जीवन तुम्हारा उत्कृष्ट हो जाएगा, ऊँचाइयाँ प्राप्त कर लेगा। मैंने अभी कहा था कि इन सबसे बचें कैसे? सबसे पहली आवश्यकता है- विचारों की शुद्धि की, मन में फालतू विचार आते हैं, फालतू विचारों से और फालतू व्यवहार से अपने आपको बचाना चाहते हैं तो कुछ टिप्स मैं आपको दे रहा हूँ। यह आदत है और आदतन आप ऐसा करते हैं। इस आदत को आप तभी सुधार पाएँगे, इस पर अंकुश तभी लग पाएगा जब आप इसके प्रति कुछ गम्भीर होंगे। तो क्या करें? मैं आपको बताना चाहता हूँ। यह सब विचार आते क्यों हैं? व्यक्ति या तो अपने भविष्य की चिन्ता करता है तो फालतू विचार आते हैं, अतीत की बातों में उलझा रहता तो फालतू विचार आते हैं, इनसिक्योरिटी का भाव होता है तो फालतू के विचार आते हैं, मन की जो इच्छाएँ हैं, वे व्यक्त नहीं हो पाती, अप्रकट रह जाती हैं तो फालतू के विचार आते है, बहुत सारे कारण हैं। मैं निवारण की बात आपसे करता हूँ। सबसे पहला काम कीजिए- प्रेक्टिकल करना शुरु कीजिए, प्रतिदिन अपना पुनरवलोकन शुरु कीजिए। पुनरवलोकन- पुनरवलोकन का मतलब रात को सोने से कुछ देर पहले आप बैठकर अथवा लेटकर सुबह से सोने के पहले तक के कृत कार्यों को, विचार को याद करिए। एक बार उनको देखिए, अपने सारे विचारों पर अपनी दृष्टि डालिए। उन्हें देखें कि यह जो विचार थे, कितने अर्थ पूर्ण थे या व्यर्थ थे। अपना एनालिसिस कीजिए।, अन्तर्विश्लेषण कीजिए और जो-जो गलत विचार हमने किए, उन विचारों के प्रति अपने मन में ग्लानि का भाव रखते हुए मन ही मन संकल्प कीजिए।






