दिव्य विचार: आत्मविश्वास नकारात्मकता होगी दूर- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज
मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि चिन्ता नहीं चिन्तन करें, ध्यान रखना सम्यग्दृष्टि पुरुष कभी भी डिप्रेश नहीं होता है और जो होते हैं वे कभी सम्यग्दृष्टि नहीं होते। चिन्ता, संताप और अवसाद सम्यग्दृष्टि व्यक्ति से कोसों दूर रहते हैं। सम्यक् के आलोक में हम अपने मन की तमाम दुर्बलताओं को दूर करने में समर्थ हो सकते हैं। उनको अपने आप से दूर करने की कोशिश कीजिये और देखिये कैसा परम रस प्रकट होता है। कैसा आनन्द आता है और कैसी परम अनुभूति होती है । वेदनाभय ध्यान रखना, दो बातें हैं - एक है सजगता और एक है शंका। सजगता होना और बात है और शंका होना भिन्न । शंका में भय है और सजगता में सावधानी । भावी अनिष्ट से बचने के लिये बढ़ती जाने वाली सावधानी बुद्धिमानी है। भावी की चिन्ता में मूढ़ हो जाना भारी मूर्खता है। चिन्तामूढ़ मत होईये । चिन्तन करके हर समस्या का हल निकालिये। बीमार हो जायें तो क्या करें ? अभी हुये तो नहीं। आज आपको बतायें कि लोग तन की बीमारी कम भोगते हैं, मन की बीमारियाँ अधिक भोगते हैं। जितने भी लोग बीमार हैं वे मन की बीमारी से बीमार हैं। तन की बीमारी का इलाज़ तो संभव है, लेकिन मन की बीमारी का इलाज़ मुश्किल है। मन के जीते जीत है, मन के हारे हार आजकल एक नई पद्धति विकसित हुई है- सेल्फ हीलिंग । जो बिना दवाई के आदमी को ठीक करती है। सेल्फ हीलिंग में बहुत डेव्हलपमेन्ट हुये हैं। भारत और विदेश, दोनों में काफी रिसर्च हुये हैं। सभी एक ही बात कहते हैं कि मनुष्य अपने आत्म विश्वास को जगाये और अपनी निगेटिविटी को खत्म करे। अपने भीतर के जितने निगेटिव इमोशन्स हैं, अन्दर की जो सारी रुग्ण मानसिकता और विकृतियाँ हैं, उन्हें दूर किया जा सकता है। वातावरण से ऊर्जा से ग्रहण करके अपने आपसे डेव्हलप होने की बात सिखाई जाती है। उसमें बताया जाता है कि मेरे भीतर की सारी बीमारियाँ खत्म हो रहीं हैं। मेरे भीतर के सारे निगेटिव इमोशन्स दूर हो रहे हैं। इस धारणा के बल पर अपने बड़े से बड़े रोगों पर काबू पाया जा सकता है और लोग पा रहे हैं। यह है सेल्फ हीलिंग ।






