दिव्य विचार: आपका हर कदम समय के अनुरूप हो- मुनिश्री चन्द्रप्रभ जी महाराज
मुनिश्री चन्द्रप्रभ महाराज जी कहते हैं कि आप समय को निभाएँ, समय आपको निभाएगा। आपका हर कदम अगर समय के अनुरूप है तो स्वयं समय ही आपकी परछाई बनेगा। संसार के सभी रहस्यमयी तत्वों में समय भी एक महत्वपूर्ण तत्त्व है। कल्पना करें, अगर धरती पर समय न होता तो शायद जो व्यक्ति जवान था, वह सदा जवान ही रहता और बूढ़ा होता तो हमेशा बूढ़ा ही रहता। समय ही कभी व्यक्ति को जन्म की ऋतु दे दिया करता है और कभी मरण का पतझड़ प्रदान कर दिया करता है। समय ही है जो कभी हर व्यक्ति के लिए संयोग का आधार बन जाता है और समय ही कभी वियोग का धरातल दे जाता है। यह समय ही है जो किसी बीज में से फूल को खिला देता है और किसी खिले हुए फूल मुरझा भी देता है। यह समय ही है जो हमें दो पल पहले हँसी-खुशी और अठखेलियाँ प्रदान कर रहा था और दो मिनट बाद ही हमें शोकमग्न कर दिया करता है। समय ही संसार का सर्जक है, संसार का पालक है। संसार का विध्वंसक भी समय ही है। हम भगवान ब्रह्मा की अर्चना इसलिए करते हैं कि वे संसार का सृजन करते हैं। समय ने हमारा सृजन किया इसलिए समय स्वयं ब्रह्मा स्वरूप है। भगवान विष्णु की हम इसलिए पूजा करते हैं कि विष्णु हम सब लोगों का पालन करते हैं। समय ही वह महामहिम है जो कि हम सब लोगों का पालन किया करता है। इसलिए समय में ही विष्णु का तत्त्व समाया हुआ हैं महादेव की अर्चना हम इस भाव से करते हैं कि सृजन और विध्वंस के बीच भी शिवत्व का भाव बनाए रखा जा सके। शिव के बारे में जग जाहिर बात है कि जब शिव का तीसरा नेत्र खुलता है तो धरती पर प्रलय मच जाता है। फिर-फिर धरती का पुनरुद्धार होने लगता है। शिव व्यक्ति के लिए महाकाल-रूप हुआ करते हैं। सच तो यह है कि समय स्वयं मनुष्य की मृत्यु और निर्वाण का द्वार खोलता है। समय केवल बादल की रचना ही नहीं करता, अपितु वह ज्वालामुखी और भूकंप का भी कारण बनता है। समय तो सबके पीछे रहने वाली आत्मा है। किसी मंदिर में ब्रह्मा, विष्णु की मूर्ति होती होगी, किसी में महादेव की।






