दिव्य विचार:बात-बात पर तनाव न लें- मुनिश्री चन्द्रप्रभ जी महाराज
मुनिश्री चन्द्रप्रभ महाराज जी कहते हैं कि तनावमुक्त जीवन हो तो प्रेम और आह्लाद का रास्ता खुलता है। यह मैं जो कुछ कह रहा हूँ, यह बिलकुल ऐसा ही है जैसे गर्मी से जलते हुए पाँव को कोई मेघ की छाँव मिली हो। नर्मदा की धारा में कोई नाव मिली हो। यदि हम छोटी-छोटी बातों पर ध्यान न दें, उत्तेजित और उद्विग्न न हों, चिंता की चिंगारी न जलाएँ तो सहज ही मानसिक तनाव से बचा जा सकता है। तनाव निश्चित ही जीवन की बहुत बड़ी बाधा है। पर एक बात यह भी सच है कि मन की ऐसी कौन-सी कमजोरी है जिस पर जीतने का संकल्प और विश्वास हम अपने भीतर करें और जीत न पाएँ। तनाव ही क्यों, जीवन की हर बाधा को आत्मविश्वास से दूर किया जा सकता हैं। अब तक हमने जीवन चाहे जैसा जीया हो पर अगर जीवन की सही समझ आ जाए तो सुबह का भूला सांय को घर लौटा हुआ ही कहलाएगा। समझ के अभाव में हम जीवन भर भटकते हैं और चेहरे पर मुखौटे ओढ़ते हैं। हमेशा रिलेक्सेशन को महत्व दीजिए। तन में भी रिलेक्स और मन में रिलेक्स। ऐसा कोई भी काम मत कीजिए जिससे टेंशन होता हो। फिर चाहे वह कितना भी जरूरी क्यों न हो। काम को कभी भी दबाव में मत कीजिए, प्रेम से कीजिए। दबाव में किया गया काम ही काम को बोझिल बनाता है। प्रेम से करो तो वही काम हलका हो जाता है। बोझिल मन से सगे भाई को देखोगे तो वह भी भार महसूस होगा, वही अगर खुशमिजाजी के साथ अगर किसी दूर के रिश्तेदार से भी मिलोगे तब भी तुम्हे भाई जैसा ही सुकुन मिल जाएगा। मै फिर कहना चाहता हूँ कि हमेशा रिलेक्सेशन को मूल्य दो, टेंशन को नहीं। प्रकृति से मोहब्बत करो, प्रकृति के सानिध्य मे जीओ, प्रकृति की व्यवस्थाओं को अपनी आँखों में बसा लो यानी जीवन हो नैसर्गिक और प्राकृतिक। प्रकृति से जुड़कर ही जीवन के विकास में विश्वास रखों कार्य हमेशा रचनात्मक हो और सोच सदा सकारात्मक हो।






