दिव्य विचार: अपने अहंकार को छोड़ें- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

दिव्य विचार: अपने अहंकार को छोड़ें- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को कम करें। यदि हमने अपने थोथे घमण्ड को कम कर दिया तो सारा काम हो जायेगा। कई बार समाज में हम देखते हैं कि छोटी-छोटी बातें बहुत बड़ा रूप ले लेती हैं। आदमी का जो अहं होता है वह उसको लड़वाता है। कभी-कभी तो स्थिति बहुत हास्यास्पद हो जाती है। एकदम घटिया सी बात इतना बड़ा रूप ले लेती है कि पूरा का पूरा समाज विद्रूपित हो जाता है और बड़ी विचित्र स्थिति बनती है। एक बार ऐसा हुआ कि एक जगह एक धार्मिक आयोजन हुआ और उस आयोजन में सभी लोग शामिल हुये। अब जो आयोजक गण थे वे सहज भाव से सारा काम कर रहे थे। वहीं समाज में एक बहुत बड़ा अभिमानी व्यक्ति भी था जो अपने आपको बहुत बड़ा आदमी मानता था। सबको निमंत्रित किया जा रहा था। संयोग से उनका नाम नहीं लिया जा सका। संयोजक को ध्यान नहीं रहा कि हम उनका नाम लें। बाद में काफी देर बाद किसी ने संयोजक को ध्यान दिलाया कि अमुक व्यक्ति भी बैठा है उनको भी बुला लिया जाये । उनको बुलाया गया तो उन्होंने अपना अपमान समझ लिया और सोचा कि इसकी इतनी औकात हो गयी कि इसने हमारा नाम नहीं लिया। यह मुझे अपमानित करना चाहता है। मैं अभी इसको मजा चखाता हूँ। मन में गाँठ बाँध ली। इसने मुझे पहले क्यों नहीं बुलाया और दूसरों के कहने पर बुलाया है। यह मुझे नीचा दिखाने का एक प्रयत्न है। अन्दर आग लग गई। सामने वाले के मन में कोई दुराशय नहीं था केवल दृष्टि न पड़ने के कारण उसका नाम नहीं पुकारा जा सका। लेकिन इसके अन्तस् में तो आग लग गई थी। अब मैं तुम्हें नीचा दिखा करके ही रहूँगा। और उसने तय कर लिया कि अब की बार चुनाव में इसको कहीं से भी आगे नहीं आने देना है और जिस समाज में कभी कहीं कोई वोटिंग नहीं हुई, उस व्यक्ति के कारण वहाँ पर मतदान कराना पड़ा। हालाँकि उसने मुँह की खाई, क्योंकि अभिमान का अन्त हमेशा बुरा होता है।