दिव्य विचार: अच्छा या बुरा सब समय वापस लौटाता है- मुनिश्री चन्द्रप्रभ जी महाराज
मुनिश्री चन्द्रप्रभ महाराज जी कहते हैं कि समय तो सबका साक्षी है। पाप सार्वजनिक मंच पर आकर करो या अपने बंद कमरे में, समय भलीभाँति जानता है कि हर पाप एक ज़हर होता है और ज़हर चाहे खुले आम पिएं या बंद कमरे में, जहर तो अपना असर दिखाता ही है। समय सबका द्रष्टा है। हमारे हर पुण्य का भी और हर पाप का भी। हम अच्छा करते हैं तब भी समय जानता है; बुरा करते हैं तब भी समय उसका साक्षी है। समय हर किसी व्यक्ति को उतना लौटा देता है जितना हम अपनी ओर से समय-समय पर सम्पादित करते हैं। समय परिवर्तनशील है। समय का अर्थ ही परिवर्तन है। समय के अनेक रूप हैं, अनेक अर्थ हैं जिनमें 'परिवर्तन' समय का मौलिक स्वभाव है। इस सृष्टि का हर तत्व परिवर्तित हो रहा है। अगर दुनिया में कोई चीज नहीं बदलती तो वह स्वयं परिवर्तन है। स्वयं के अतिरिक्त वह हर किसी को बदलता रहता है। क्या हमारे पास कोई ऐसा लेखा-जोखा है कि हमने अब तक कितने परिवर्तन देखे हैं? जिसके माथे पर सफेद बाल उग आए हैं, कभी वे काले ही थे। हम बदल गए। हमारा तन बदल गया। हमारे बाल बदल गए। हमारे अंग बदल गए। हमारे हाथ में लाठी चली आई है। हमारी आँखें कमजोर हो चली हैं। सब बदल रहा है यहाँ। कल हम जवान थे, उससे पहले बच्चे थे, उससे पहले माँ की कोख में थे, उससे पहले शरीर के एक अणुभर, समय के एक कण भर थे। समय ने ही हमें कण से छः फुट की काया दी। यही समय जब बदलना शुरू होता है, तो पुनः घटते-घटते हम सब लोग केवल एक मुट्ठी भर राख हो जाया करते हैं। समय सबको बदल ही देता है। जो नदिया की धार इस समय इधर आ रही है, वह धार आगे चली जाती है। लगता है, धार वही है पर पानी आगे बह गया है। हमारे जीवन का एक चरण आगे चला गया। किन्तु सातत्य तो बना हुआ है, निरन्तरता बनी हुई है जिससे लगता है कि जीवन एक ही है।






