दिव्य विचार: अच्छे कार्य की तारीफ जरूर करें- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज
मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि किसी को अपने व्यवहार से घायल मत करो। अगर बन सके तो दूसरों को अपना कायल बनाने का प्रयत्न करो। सम्यग्दृष्टि व्यक्ति वह है जो सबको अपना कायल बना देता है। अज्ञानी वह है जो दूसरे को घायल बनाने के प्रयत्न में लगा रहता है। कायल बनाओ, घायल मत करो। यह व्यवहार पर निर्भर करता है। मैं आपसे कहता हूँ कि किसी के पास कोई चीज़ आये तो प्रशंसा करना शुरू कर दीजिये, आज से नियम ले लीजिये। पर मन से प्रशंसा करना और मधुरता से करना । कई-कई बार लोग प्रशंसा भी करते हैं, पर ब्याज स्तुति कर देते हैं। यह बड़ी खतरनाक होती है। ऐसी प्रशंसा कि सामने वाला झेल न सके। यह गलत है। प्रशंसा कीजिये ऐसी जो सामने वाले को प्रसन्नता से भर दे। पिता-पुत्र के बीच अनबन है। मैं देखता हूँ कि पिता का स्थान पिता का है, पुत्र का स्थान पुत्र का है। लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि बेटा अगर बाप भी बन जाये तो भी बाप के आगे वह बेटा ही बना रहता है और उसके पिता उसको बुद्धु ही समझते हैं, इसलिये एक-दूसरे के प्रति तालमेल नहीं हो पाता है। आप चाहते हैं कि आपका बेटा आपका बहुमान तो बेटे ने अगर कोई अच्छा काम किया तो उसकी प्रशंसा करो, उसका भरोसा करो। हाँ बेटा तूने ठीक किया, उसकी पीठ थपथपाओ। मीन मेख मत निकालिये। कभी भी मीन-मेख से प्रेम स्थापित नहीं होता है। प्रेम तो केवल प्रेरणा और प्रोत्साहन से ही प्रकट हो सकता है, इसलिये इसे अपने आपसे दूर रखने की कोशिश करिये और देखिये जीवन में क्या रस प्रकट होता है ? जीवन का कैसा आनन्द प्रकट होता है, वह हमें धीरे-धीरे विकसित करने की ज़रूरत है। जब हम उसको विकसित करने में समर्थ हो जाते हैं तो हमारे जीवन की धारा अपने आप परिवर्तित हो जाती है। उसको परिवर्तित करने का निरन्तर प्रयत्न करें। मैंने आपसे प्रारम्भ में ही कहा कि गुणानुरागी बनिये और गुणों को प्रोत्साहन देना शुरू कर दीजिये । अपना बेटा अगर कुछ अच्छा कर रहा है तो प्रोत्साहित करिये। और फिर अड़ोस-पड़ोस के लोग कुछ अच्छा कर रहे हैं तो उनकी भी प्रशंसा कीजिये।






