दिव्य विचार: कल के भरोसे में रहने वाला पछताता है- मुनिश्री चन्द्रप्रभ जी महाराज

दिव्य विचार: कल के भरोसे में रहने वाला पछताता है- मुनिश्री चन्द्रप्रभ जी महाराज

मुनिश्री चन्द्रप्रभ महाराज जी कहते हैं कि समय के साथ अपनी मैत्री साधें। समय तो हमारे लिए एक अवसर के रूप में आता है। अगर कोई व्यक्ति समय का सही समय पर सही उपयोग कर ले तो अवसर अपना परिणाम दे देता है। अगर उपयोग न कर पाएँ तो अवसर व्यर्थ हो जाता है। छोटा-सा भी अवसर मिले तो उपयोग कर लें। यह प्रतीक्षा न हो कि बड़ा अवसर आएगा तब देखेंगे। छोटे-छोटे अवसरों का जो लोग उपयोग करते हैं, वे बड़े अवसरों का भी उपयोग कर लेते हैं और जो लोग छोटे-छोटे अवसरों का उपयोग करना नहीं जानते, वे बड़े से बड़े समय और अवसर के उपयोग से भी वंचित रह जाते हैं। हम समय को अपने लिए कसौटी समझें। वह आता है और हमारी कसावट करता है। अच्छे-बुरे कैसे हैं, इस बात की कसौटी करता है और फिर आगे निकल जाया करता है। समय आता है, अवसर बनकर आता है। उसका जो उपयोग कर ले, समय उसका है वरना समय फिर नदिया की धार की तरह आगे बढ़ जाता है। समय आता है और हम सोचते हैं कि अपना काम कल करेंगे, पर दुनिया में बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं जिनको कल देखने को नहीं मिला करता है। अब यह तो हम पर है कि हम यह बोध पा लें कि कल आएगा या नहीं। आज को भी इतनी सार्थकता के साथ जी लें कि अगर कल भी हो तो कल भी हमारे आज की पुनरावृत्ति हो । कल की बात को छोड़ना ही जीवन की सार्थकता है। कल के भरोसे रहने वाला सदा पछताता है और कभी-कभी तो उसे पछताने का भी अवसर नहीं मिल पाता है क्योंकि समय की आँधी हमें हमारी पहुँच से दूर उड़ा ले जाती है। आज अपना है। जो होना है, जो करना है, आज ही हो जाए, आज ही कर लें। कल हमारा अज्ञान है, आज हमारा बोध है। मेरे लिए समय अगर मौत बनकर आता है तो आज ही आ जाए। अभी आ जाए तो भी पूरी तरह फिट हूँ। उसकी प्रतीक्षा है। इस समय भी इतना कुछ किए हुए हैं कि मौत आ भी जाए तो केवल काया को गिराएगी, हमें न गिरा पाएगी। मौत की ऐसी प्रतीक्षा नहीं है कि वह साठ साल बाद आएगी। अगर उसे साठ साल बाद आना है तो हमें कोई दिक्कत भी नहीं है।