दिव्य विचार: जीवन में बहुत सजग रहने की जरूरत- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

दिव्य विचार: जीवन में बहुत सजग रहने की जरूरत- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि जीवन के विषय में हमें बहुत सजग होने की जरूरत है। बन्धुओ ! आत्मकल्याण के विषय में जब भी व्यक्ति से बात की जाय तो वह बहुत पीछे हो जाता है। दुनियाँ में तो तरह-तरह की योजनाएँ बनाता है, आत्मा के कल्याण की बात वह कर भी जरूर लेता है लेकिन जब करने की बात आती है तो वह पीछे हट जाता है। योजनाएँ बनती रहती हैं। दो मित्र आपस में मिले, एक-दूसरे की दिनचर्या की बात पूछी गई दिनचर्या क्या है? एक ने बोला - मैं सुबह पाँच बजे उठता हूँ। नित्य क्रियाओं से निवृत्त होता हूँ। स्नान करता हूँ, पूजा-पाठ करता हूँ, उसके बाद नास्ता करता हूँ, न्यूज पेपर पढ़ता हूँ। ठीक नौ बजे दफ्तर जाता हूँ। वहाँ से पाँच बजे लौटता हूँ। घर आकर थोड़ा विश्राम करता हूँ, भोजन करता हूँ, बच्चों को पढ़ाता हूँ और ठीक दस बजे सो जाता हूँ। आपकी दिनचर्या कैसी है? दूसरे ने कहा- मैं चार बजे प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठता हूँ, ब्रह्ममुहूर्त ऋषि, मुनियों के उठने की चर्या है, उठते ही मैं थोड़ा प्राणायाम करता हूँ, उसके बाद नित्यक्रिया करता हूँ, नित्यक्रियाओं के बाद थोड़ा घूमने जाता हूँ, आ करके थोड़ा खेलता हूँ, व्यायाम करता हूँ और उसके बाद थोड़ा में स्वाध्याय करता हूँ, नास्ता-पानी करता हूँ, दफ्तर जाता हूँ, शाम को लौटकर आता हूँ, फिर मेरा संध्यावंदन का कार्य होता है, फिर थोड़ी देर बच्चों के साथ खेलता हूँ, फिर उन्हें पढ़ाता भी हूँ और डेली ग्यारह बजे सोता हूँ। सामने वाला मित्र बड़ा प्रभावित हुआ। कहा- आपकी दिनचर्या तो बड़ी व्यवस्थित है, ऐसा आप कब से कर रहे हो? उसने कहा- कल से ही करने का विचार है। ऐसे ही विचार बनाने वाले बहुत सारे लोग होंगे, आप में से भी होंगे, जो कल से करने का विचार करेंगे। ध्यान रखना, जो आज से विचार करोगें तो हो जायेगा किंतु कल से करोगे तो कल तो कभी नहीं आने वाला। काल को कोई जीत नहीं सकता। इस बात को समझने की कोशिश करनी चाहिए। बीते हुए क्षण कभी लौट कर नहीं आते, इस बात को समझे, जीवन की वास्तविकता को पहचानें।