दिव्य विचार: अभिमानी का नाश होना निश्चित- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज
मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि कई लोग हैं जो अहं में अकड़कर आसमान में चढ़ना चाहते हैं, लेकिन जो अहं में चढ़कर आसमान में चढ़ने का सपना देखता है वह आसमान में तो नहीं चढ़ सका, अपितु उसको जमीन में दबना जरूर पड़ा है। आसमान में चढ़ने का सपना देखने वाले को ज़मींदोज़ होना पड़ता है। इसलिये ऐसा सपना कभी मत देखो। रावण जैसे अभिमानी की लंका का नाश हो गया और आज उसका नाम लेने वाला भी कोई नहीं है। जिसके यहाँ एक लाख पुत्र और सवा लाख नाती थे। उसके यहाँ आज दीपक जलाने वाला भी कोई नहीं है। इसलिये इन सब बातों का ध्यान में रख करके चलना चाहिये। छोटी-मोटी बातों को जब हम बड़ा रूप देना शुरू कर देते हैं तो बहुत सारी गड़बड़ियाँ शुरू हो जाती हैं। चुनाव में मिलेगा कुछ नहीं' और ध्यान रखना कदाचित् आप कुछ आगे आ भी गये तो कोई स्वर्ग का मुकुट तुम्हारे ऊपर थोड़ी ही न रखा जा रहा है। यह तो कांटों का ताज है, इसे केवल एक दायित्व और एक ज़िम्मेदारी के साथ स्वीकार करना चाहिये। बाकी इन बातों को अपने स्वार्थ का आधार कतई नहीं बनाना चाहिये। हम इन चीजों से यदि उपरत होकर के चलते हैं। तो वह हमारे जीवन की एक बहुत बड़ी उपलब्धि बनती है। और यदि इन बातों को हम पकड़कर चलते हैं तो वह हमारे विनाश का कारण बनती है, इसलिये इन सब बातों को दूर करो / इन सब बातों से दूर रहो। जो अपनी दूषित महत्त्वाकांक्षायें हैं उनको दूर करो। आज समाज में भी ऐसे अनेक लोग हैं जो आज अपनी महत्त्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिये समाज के सुख-चैन को लील जाना चाहते हैं। और क्यों न हो आज समाज में दुर्योधन और शकुनियों का बाहुल्य हो रहा है और समाज के बुजुर्ग धृतराष्ट बने बैठे हैं। जब तक ऐसी स्थिति रहेगी तब तक समाज में खुशहाली लौट नहीं सकती है। आवश्यकता है हमें एक सही शुरूआत करने की जिससे समाज में स्वस्थ परम्परा की शुरूआत हो, जिससे समाज में शान्ति और सद्भाव का वातावरण निर्मित हो और लोग एक-दूसरे के साथ हिलमिलकर चलने को तैयार हों फिर देखिये समाज में क्या आनन्द रस आता है।






