दिव्य विचार: हर किसी से प्रेमपूर्ण संबंध रखें- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

दिव्य विचार: हर किसी से प्रेमपूर्ण संबंध रखें- मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज

मुनिश्री प्रमाण सागर जी कहते हैं कि प्रेम सदैव प्रेम को बढ़ाता है। आप प्रेमाभिव्यक्ति करेंगे तो रिटर्न में भी प्रेमाभिव्यक्ति होगी। आप वैसा नहीं करेंगे तो ऐसा नहीं हो सकता। इसलिये संत कहते हैं स्माईल दीजिए। कोई कितना भी गुस्सा हो उसके सामने हल्की सी स्माईल दे दो। उसका पारा ठंडा हो जायेगा। मेरे साथ एक लड़का पढ़ता था बड़ा उत्पाती था। लेकिन जब भी किसी शिक्षक को उस पर गुस्सा आता वह एक स्माईल ऐसी देता कि उसका गुस्सा ठंडा हो जाता। हल्का सा स्माईल एक पूरे वातावरण को बदल सकता हैं। आप यह देना शुरु कीजिए। यह चारों बातें प्रेम विस्तार का कारण बनेंगी और जिस घर-परिवार में यह बातें समाहित होगी उनके जीवन में कभी कटुता पूर्ण सम्बन्ध नहीं बनेंगे सारे सम्बन्ध प्रेमपूर्ण बनकर ही रहेंगे इसलिए प्रेमपूर्ण सम्बन्ध को मेनटेन करने के लिये जो मैंने चार बात की (1) धन्यवाद दीजिए (2) प्रशंसा करना सीखिए (3) सॉरी कहिए और (4) स्माईल दीजिए, मुस्कुराना सीखिए। अन्दर की मुस्कराहट होना चाहिये। देखिए आप लोग कुकर में खाना बनाती हैं, खाना बनाती हैं रोज बनाती हैं, उसमें सीटी बजती हैं, कब बजती है, जब उसमें प्रेशर बढ़ जाता हैं, तब उसमें सीटी बजती हैं, और अगर सीटी नहीं बजे तो कुकर फट जायेगा। बस मैं आप को यही फार्मूला देता हूँ जब भी दिमाग में प्रेशर बढ़ने लगे तो प्रसन्नता की सीटी बजा दीजिए नहीं तो यह फट जायेगा। एक हल्की सी स्माईल आज वही दुर्लभ हो गई है। बाकी सब चीजे हैं यह स्माईल पास में नहीं टिकती। संत कहते हैं तो स्माईल हमारे भीतर आनी चाहिये वह जीवन की धरोहर है तो पहली बात प्रेम पूर्ण सम्बन्ध रखें दूसरी बात एक दूसरे की योग्यता की कद्र करे। जिसकी जो योग्यता हैं, उसके साथ वैसा व्यवहार करें, योग्यता की कद्र करें, हर व्यक्ति में अपनी योग्यता होती है, उसको उस तरीके का मूल्यांकन मिलना चाहिये कोई उपेक्षित नहीं होना चाहिये।