दिव्य विचार: हर कार्य को उत्साह के साथ करें- मुनिश्री चन्द्रप्रभ जी महाराज

दिव्य विचार: हर कार्य को उत्साह के साथ करें- मुनिश्री चन्द्रप्रभ जी महाराज

मुनिश्री चन्द्रप्रभ महाराज जी कहते हैं कि यह मनुष्य की आदत है कि उसे बोझ के बिना जीवन बेकार लगता है। हमें इस बोझ की यंत्रणा से बाहर आना है। मैंने देखा है कि कुछ साधु-संत स्वयं को शारीरिक यंत्रणा देते हैं तो संसारी लोग मानसिक यातनाएँ ओढ़े रहते हैं। अगर वे अपने मन को स्वस्थ रखने का तरीका स्वयं जान लें तो आधी चिकित्सा स्वयं करने में समर्थ हो जाएँगे। तब उन्हें किसी न्यूरो-फिजिशियन के पास नहीं जाना पड़ेगा। प्रायः औषधियाँ तो मनुष्य के घटे हुए आत्मबल को बढ़ाने के लिए नहीं दी जाती हैं लेकिन अगर वह स्वयं ही अपना आत्मबल अथवा मनोबल जाग्रत कर ले तो जो काम दवा करेगी, वह खुद ही कर सकेगा। तुम्हारा संकल्प, साहस और शौर्य सब कुछ कर सकता है। आप प्रत्येक कार्य प्यार से करें, उदासीनता से नहीं। मैं हमेशा कहा करता हूँ कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। छोटे होते हैं विचार। दान की रोटी खाने की अपेक्षा अपनी मेहनत की रूखी-सूखी रोटी खाना कहीं अधिक श्रेष्ठ है। जीवन में स्वावलम्बन को अपनाना अपने जीवन को और अधिक दस वर्ष का आयुष्य देना है। तुम किस मनोदशा से कार्य को सम्पादित करते हो, वही मूल्यवान है। अगर बोझिल मन से या बेमन से आप किसी कार्य को करेंगे तो वह कार्य आपके पाँव की बेड़ी बन जाएगा। वहीं आप यदि प्रसन्नचित्त होकर कोई कार्य करते हैं तो वही कार्य आपके पाँव की पाजेब बन जाएगा। जो कार्य बंधन अथवा बेड़ी बनता है, वही कार्य मुक्ति का प्रथम द्वार भी बन सकता है बशर्ते तुम अपने कार्य से प्यार करना सीख जाओ। अगर तुम जिंदगी भर खुशियाँ चाहते हो, आनन्द और प्रसन्नता चाहते हो तो मैं कहूँगा कि आप अपने काम से प्यार करना सीखें। थोड़ी-सी खुशियाँ छोटे से कामों से मिल जाती हैं, लेकिन जीवन भर की खुशी केवल अपने काम के प्रति प्यार से ही मिलती है। तहजीब तथा सम्मान से आप अपना कार्य करें। जब भी मनोयोगपूर्वक आप अपना कार्य करेंगे, वह कभी भी भारभूत नहीं लगेगा। हर कार्य आपको सुख का सुकून दे जाएगा।